
इन्दौर, जिस तरह कुम्भकार मिट्टी को ऊपर और अंदर से ठोंक-पीटकर कलश का आकर देते हैं, वैसे ही गुरु भी अपने शिष्यों की काछी मिटटी को अपनी थपकियों से तपाकर कुंदन में बदलने का काम करते हैं। गुरु जीवन की बुराइयों को दूर कर व्यक्ति को निर्दोष बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के आद्याचार्य स्वामी रामचरण महाराज ने भी अपने शिष्यत्व भाव से स्वयं को गुरु के सानिध्य में इस तरह तपाया कि आज पूरे विश्व में रामस्नेही सम्प्रदाय का नाम पूरी आभा के साथ चमक रहा है और सदियों तक चमकता रहेगा। राम नाम की आभा इस दुनिया से कभी खत्म नहीं हो सकती।
ये दिव्य विचार हैं रामस्नेही सम्प्रदाय के संत हर्षराम महाराज तालवाले के, जो उन्होंने छत्रीबाग रामद्वारा पर अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के मूलाचार्य स्वामी रामचरण महाराज के 275वें दीक्षा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। प्रारम्भ में छत्रीबाग रामद्वारा न्यासी मंडल के सदस्यों के साथ संत हर्षराम ने स्वामी रामचरण महाराज के चित्र एवं उनके ग्रन्थ का सामूहिक पूजन कर महाआरती में भाग लिया। रामधुन और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। बड़ी संख्या में दूर-दूर के श्रद्धालु इस कार्यक्रम में शामिल होने आए थे।
संत श्रीहर्षराम ने कहा कि गुरु की कृपा हो तो शिष्य के जीवन में मंगलाचार हो ही जाता है। स्वामी रामचरण महाराज ने अपने गुरु कृपाराम महाराज के सानिध्य में रहकर कमल के फूल की तरह स्वयं को संसार के दलदल से बचाकर लक्ष्मी रूपी रामस्नेही सम्प्रदाय के चरणों में समर्पित कर दिया। आज पूरे विश्व में राम नाम की अविरल धारा और ध्वजा प्रवाहित हो रही है तो इसके पीछे हमारे आद्याचार्य स्वामी रामचरण महाराज के तप, त्याग और साधना का ही नतीजा है। जो व्यक्ति अपने मन के संसार में विषयों और वासनाओं रूपी बुराइयों को जीत लेता है, वही समाज और समुदाय का सही मार्गदर्शन कर सकता है। स्वामी रामचरण महाराज ने अपनी भक्ति और साधना से इतना विशाल संप्रदाय स्थापित कर राम नाम का डंका पूरी दुनिया में बजा दिया है। उनका यह ऋण हम कभी नहीं उतार सकते।
