छात्रवृत्ति के पात्र विद्यार्थियों को फीस/शुल्क भुगतान नहीं कर पाने पर परीक्षा से नहीं किया जाए वंचित

कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने जिले के सभी शासकीय/अशासकीय अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थाओं के प्रमुखों को निर्देश दिए है कि वे पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के आवेदनों का समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करें। छात्रवृत्ति के पात्र ऐसे विद्यार्थी जिन्होंने फीस/शुल्क का भुगतान नहीं किया है, उन्हें परीक्षा से वंचित नहीं किया जाए। ऐसा पाये जाने पर संबंधित संस्थानों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर श्री वर्मा ने जनसुनवाई एवं सीएम हेल्पलाईन में दर्ज शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए अनियमितताएं करने वाले शिक्षण संस्थानों के विरूद्ध दण्डात्मक कार्यवाही के निर्देश दिए है।
बताया गया कि निजी शैक्षणिक संस्थाओं में अध्ययनरत् अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं का एडमिशन डाटा पोर्टल पर अपलोड नहीं होने से या अन्य तकनीकी समस्याओं के कारण पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए पात्र होकर भी आवेदन नहीं कर पाते है। संस्थाओं की शैक्षणिक शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं करने से उन्हें परीक्षा में सम्मिलित नहीं होने दिया जाता है।
कलेक्टर श्री वर्मा ने कहा कि इंदौर जिला उच्च शिक्षण क्षेत्र में प्रदेश का एज्युकेशन हब है। प्रदेश के सभी जिलों के मध्यमवर्गीय परिवार के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के ऐसे छात्र-छात्राएं, जो स्कॉलरशिप बेस पर शासकीय/अशासकीय संस्थाओं में प्रवेश लेते है, किन्तु पोर्टल पर संस्थाओं द्वारा समय पर एडमिशन डाटा या फीस डाटा अपलोड नहीं करने के कारण या अन्य तकनीकी कारणवश समय पर ऑनलाईन आवेदन दर्ज नहीं कर पाते है।
कलेक्टर श्री वर्मा ने कहा कि यह शैक्षणिक संस्था का दायित्व है कि विद्यार्थियों का एडमिशन डाटा एवं फी डाटा अपने संबंधित लाईन डिपार्टमेंट से समन्वय स्थापित कर समय पर अपलोड एवं अप्रूव करवाकर MPTAASC पोर्टल पर अपलोड किया जाए। कुछ संस्थाएँ पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति आवेदन की दिनांक निकल जाने पर और पोर्टल लिंक बंद होने के उपरान्त यह कार्यवाही करते है जिसके कारण पात्र विद्यार्थी के आवेदन दर्ज करने से वंचित रह जाते है और प्रायः जनसुनवाई/सी.एम. हेल्पलाईन में शिकायत दर्ज करते है। उक्त कार्य महाविद्यालय स्तर से देरी होने के कारण ऐसी स्थिति में छात्रवृत्ति भुगतान में विलंब होने की स्थिति में महाविद्यालय की फीस/शुल्क भुगतान समय पर नहीं कर पाते है तो महाविद्यालय द्वारा उनके परीक्षा फॉर्म अप्रूव या रिजल्ट अपडेट करने की प्रक्रिया नहीं रोकी जाए।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि ऐसे पात्र विद्यार्थियों को परीक्षा से वंचित नहीं किया जायें। महाविद्यालयों द्वारा छात्र-छात्राओं को मानसिक प्रताड़ित किया जाता है, जिससे विद्यार्थियों के शैक्षणिक गतिविधि पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। समस्त संस्था प्रभारी एडमिशन डाटा, फी डाटा एवं परीक्षा परिणाम MPTAASC पोर्टल पर अपलोड एवं अपडेट करवाने की कार्यवाही अपने संबंधित लाईन डिपार्टमेंट से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर समय पर करें और विद्यार्थियों की समस्या का निराकरण अपने स्तर से करें ताकि विद्यार्थी सी.एम. हेल्पलाईन एवं जनसुनवाई में जाने के लिए विवश ना हो। भविष्य में जनसुनवाई में किसी भी शिक्षण संस्थान के विद्यार्थियों द्वारा यदि इस संबंध में शिकायत की जाती है तो संबंधित शिक्षण संस्थान के विरुद्ध दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही संबंधित विभाग को भी ऐसी शिक्षण संस्थाओं की मान्यता के संबंध में पुनर्विचार करने हेतु पत्र जारी किया जाएगा।
