
इंदौर। Gen Z आज सिर्फ सोशल मीडिया, कॉलेज कैंपस और राजनीतिक बहसों तक सीमित नहीं है। उसकी मौजूदगी अब उन जगहों पर भी दिखाई देने लगी है, जहां परंपरा और आस्था केंद्र में होती है। इंदौर का एक गणेश पंडाल जो देश में अनोखा उदाहरण बन गया है।शहर के पश्चिमी क्षेत्र में महाराणा प्रताप चौक के राजा के नाम से प्रसिद्ध गणेश पंडाल को इस बार Gen Z की सोच, भाषा और भागीदारी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। पंडाल की थीम में युवाओं के विचार, उनके सवाल और सामाजिक मुद्दों के प्रति उनकी सोच को जगह दी गई है।इस पंडाल की खासियत सिर्फ इसकी सजावट नहीं, बल्कि इसका इंटरैक्टिव अंदाज है। यहां आने वाले युवा पंडाल में लगाए गए वॉल पर अपने विचार लिख रहे हैं। यानी दर्शक सिर्फ देखने वाले नहीं, बल्कि इस पूरी थीम का हिस्सा बन रहे हैं।आयोजन के संरक्षक इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव हैं। उनके मार्गदर्शन में तैयार इस थीम में कोशिश की गई है कि गणेशोत्सव को युवाओं की बदलती सोच और संवाद से जोड़ा जाए।
पंडाल बना युवाओं की ‘वॉल ऑफ थॉट्स’
यहां बड़ी संख्या में युवा पहुंच रहे हैं। कोई अपने विचार लिख रहा है, कोई सवाल छोड़ रहा है तो कोई सामाजिक बदलाव को लेकर अपनी बात दर्ज कर रहा है। इस तरह गणेश पंडाल धीरे-धीरे एक तरह के ‘वॉल ऑफ थॉट्स’ में बदलता नजर आ रहा है दरअसल, Gen Z की खासियत ही यही मानी जाती है कि वह सिर्फ किसी मुद्दे को सुनना नहीं चाहती, बल्कि उस पर अपनी राय भी दर्ज करना चाहती है। इंदौर के इस पंडाल ने इसी प्रवृत्ति को गणेशोत्सव की परंपरा के साथ जोड़ने की कोशिश की है यानी इस बार गणेश पंडाल में सिर्फ गणपति के दर्शन नहीं हो रहे युवा अपनी सोच भी छोड़कर जा रहे हैं।
