
खंडवा रोड स्थित अखंड परम धाम आश्रम पर चल रहे 30वें सत्संग एवं ध्यान योग शिविर का समापन – हजारों भक्तों ने किया गुरू पूजन
इंदौर रास्ता भले ही कठिन हो, लेकिन चलना बंद नहीं करना चाहिए। चींटी थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़कर अपनी मंजिल तक पहुंच ही जाती है। देहाभिमान सबसे बड़ी समस्या है। परमात्मा का ज्ञान लेते समय भी देहाभिमान खत्म नहीं होता। अंतःकरण से देहाभिमान जाएगा, तभी परमात्मा का वृहद ज्ञान अंदर आएगा। गुरू पूजा भी भगवान की पूजा है। मंदिर में बैठकर हमारा मन प्रेम और भक्ति में डूब जाए तो वह पूजा महोत्सव बन जाएगी। महोत्सव श्रद्धा और विश्वास से ही ऊर्जावान बनेगा। मन की एकाग्रता हर क्षेत्र में जरूरी है। मन की तरंगों को स्थिर बनाने के लिए गुरू का मार्गदर्शन अपरिहार्य होता है।
रामजन्म भूमि मंदिर न्यास अयोध्या के प्रमुख न्यासी एवं युगपुरुष स्वामी परमानंद गिरि महाराज ने रविवार को खंडवा रोड स्थित अखंड परम धाम आश्रम पर चल रहे सात दिवसीय 30वें ध्यान एवं योग शिविर के समापन प्रसंग पर उपस्थित भक्तों को आशीर्वचन देते हुए उक्त प्रेरक विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर देश-विदेश से आए शिष्यों और भक्तों ने गुरू पूर्णिमा महोत्सव के तहत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पाद पूजन भी किया और नाचते-गाते हुए अपने सदगुरू के शतायु होने की कामनाएं भी व्यक्त की। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन एवं देवी अहिल्या गौशाला समिति के अध्यक्ष राधेशयाम शर्मा गुरूजी ने भी युगपुरुष से आशीर्वाद प्राप्त किए। आश्रम पर राजेंद्र कुमार शर्मा एवं कैलाशचंद्र लाडवा के सौजन्य से स्थापित की गई लिफ्ट का शुभारंभ भी युगपुरुष स्वामी परमानंद एवं महामंडलेश्वर स्वामी ज्योतिर्मयानंद ने किया। इसके पूर्व शनिवार को स्वतंत्रता दिवस पर गुरुदेव ने संतों के साथ ध्वजारोहण कर सबको बधाई एवं शुभकामनाएँ दी। रविवार को गुरु पूर्णिमा के मुख्य महोत्सव में आयोजन समिति की ओर से सुरेश शाहरा, विजय शादीजा, राजेश रामबाबू अग्रवाल, सीए विजय गोयनका, श्यामलाल मक्कड़, रघुनाथ गनेरीवाल, विष्णु कटारिया, गोविंद सोनेजा, तिलकराज ठक्कर, विनोद अग्रवाल भीकनगांव, दिनेश गोयल पचौर, श्यामलाल शादीजा एवं दिनेश शादीजा (नाशिक), अभिभाषक ज्योतिरादित्य दवे, प्रवीण मित्तल (मुंबई), जयकिशन ढींगरा, संजय आहूजा, श्रीराम अग्रवाल (महू) आदि ने गुरूदेव का पूजन किया। संतों की अगवानी अमरलाल नारंग, निरंजन पुरोहित, मुकेश राजानी, किशोर आर्य, अरुण गोयल आदि ने की।
गुरू पूर्णिमा के उपलक्ष्य में आज परमानंद सभागृह का मंच फूलों से श्रृंगारित किया गया था, जहां भक्तों ने कतारबद्ध होकर अपने आस्था और श्रद्धा के फूल एवं अन्य उपहार समर्पित किए। युगपुरुष स्वामी परमानंद महाराज ने भी भक्तों को अपनी ओर से आशीर्वाद के साथ उपहार भी भेंट किए। भक्तों द्वारा युगपुरुष के पूजन का यह सिलसिला लगभग दो घंटे तक चलता रहा। सामूहिक आरती के साथ शिविर एवं सत्संग सत्र का समापन हुआ। हरिद्वार के महामंडलेश्वर स्वामी ज्योतिर्मयानंद, महामंडलेश्वर साध्वी दिव्य चेतना गिरि, साध्वी चैतन्य सिंधु एवं योगाचार्य शिवप्रकाश गुप्ता दाऊ सहित अनेक संत-विद्वान भी इस अवसर पर उपस्थित थे, जिन्होंने प्रवचनों के माध्यम से गुरू की महत्ता भी बताई और साधकों को योग एवं ध्यान के सूत्र भी बताए। संचालन राजेश रामबाबू अग्रवाल एवं साध्वी चैतन्य सिन्धु ने किया और आभार माना समन्वयक विजय शादीजा ने।
अपने आशीर्वचन में युगपुरुष ने कहा कि हमेशा कोशिश करें कि मीठा बोलें और अपनी वाणी से दूसरों को अपना बनाने की दिशा में प्रयास करें। क्रोध से बचकर रहेंगे तो अनेक रिश्ते बचा लेंगे। क्रोध हमारे बहुत सारे रिश्तों को खराब कर देता है। प्रवचनों की अमृत वर्षा के बाद युगपुरुष को भक्तों ने मार्ग के दोनों और खड़े रहकर पुष्प वर्षा के बीच उज्जैन के लिए विदाई दी। करीब पांच हजार भक्तों ने गुरू प्रसाद का पुण्य लाभ उठाया।
