
मेक म्यूज एवं सुर अंजलि-4 की मेजबानी में दुआ सभागृह में जवां हो उठी इन्द्रधनुषी शाम
इंदौर, शहर के गीत-संगीत प्रेमियों के लिए मेक म्यूज और सुर अंजलि-4 की संयुक्त मेजबानी में दुआ सभागृह में एक ऐसी यादगार शाम संजोयी गई जिसमें 50 से 75 वर्ष की आयु वाले बुजुर्गों ने मंच से अपनी जोशीली और सुरीली आवाज़ से खचाखच भरे सभागृह में मौजूद हर उम्र के श्रोताओं को सम्मोहित बनाए रखा। मेक म्यूज संस्थान के डायरेक्टर राजीव रॉय के निर्देशन में इस सुहानी और मतवाली शाम को श्रोता लम्बे समय तक भुला नहीं पाएंगे। संगीतज्ञ प्रकाश खानवलकर और अन्नू शर्मा के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस शाम ने अपने इन्द्रधनुषी रंगों से श्रोताओं को पूरे समय जवां बनाए रखा।
मेक म्यूज और सुर अंजलि म्यूजिक संस्थान द्वारा इस दावत में शामिल हुए 75 वर्ष आयु तक के गायकों ने पहले तो लगातार दो सप्ताह तक रियाज की और फिर पूरी तैयारी से जब दुआ सभागृह के मंच पर पहुंचे तो देखते ही देखते इन गैर पेशेवर गायकों ने अपनी प्रस्तुतियों से सबका मन मोह लिया। शास्त्रीय संगीत की बारीकियों, मुरकियों और राग-रागिनियों को इन कलाकारों ने बहुत सहजता से सामने बैठे श्रोताओं के दिलों तक पहुँचाया। इन कलाकारों में मुख्य रूप से किशोर पांडव, अर्चना भास्कर, ऋतम्भरा, राजेंद्र कुलकर्णी, संगीता पुराणिक, निर्मला परमार, शिरीष गोडबोले, संतोष मौत और सुनैना नाइक सहित एक दर्जन कलाकारों के नाम प्रमुख हैं जिन्होंने “दूर रहकर न करो बात…”, “वो जब याद आए, बहुत याद आए….”, “मेरे नैना सावन भादौ….”, “एहसान तेरा होगा मुझ पर…”, “पिया तोसे नैना लागे रे….”, “हम तेरे प्यार में सारा आलम खो बैठे….”, “इशारो इशारों में दिल देने वाले…”, “दिल ए बेताब को हुआ क्या है….”, “फिर मिलोगे…” जैसे रेट्रो और सदाबहार गीतों को इतने भावपूर्ण अंदाज में प्रस्तुत किया कि सामने बैठे युवा श्रोता भी गुनगुनाने और नाचने-थिरकने पर बाध्य होते रहे। मंच का संचालन सतीश पाण्डेय ने किया और उन्होंने गीतों की पृष्ठभूमि, राग-रागिनियों और बारीकियों को रोचक शैली में प्रस्तुत कर शाम को और हसीन बना दिया।
इस सुहानी शाम की शुरुआत कल्पना साकेत ने भक्ति गीत “ओम नमः शिवाय….” से की। भक्तिमय वातावरण के बीच जैसे-जैसे गायक आते रहे सभागृह का मौसम और मिजाज भी अटखेलियाँ करने लगा। किशोर पांडव और अर्चना भास्कर ने “दिल ए बेताब”, ऋतम्भरा द्विवेदी ने “दिल हूम-हूम करे”, राजेंद्र कुलकर्णी एवं संगीता पुराणिक ने “वो जब याद आए बहुत याद आए” गाकर इस शाम को और रंगीन बना दिया। इनके बाद क्लासिकल बेस्ड राधिके “तूने बंसी चुराई” तथा “झनक-झनक तोरी बाजे पायलिया” एवं “पूछो न कैसे मैंने रेन बिताई” के बाद संतोष मोठ और निर्मला परमार ने “मेघा से मेघा” गाकर वर्षा के लिए तरस रहे श्रोताओं को थोड़ी देर के लिए ही सही, बरसात की याद ताजा कराई। सुनैना नाइक और अर्चना ने “तुमको पिया दिल दिया”, राजेंद्र कुलकर्णी और संगीता ने “कभी रातदिन हम दूर थे” गाकर बुजुर्ग श्रोताओं को उनकी तरुणाई के दिन याद दिला दिए।
कार्यक्रम में हर्षद शेवगांवकर की आर्केस्ट्रा टीम में आक्टोपेड पर शैलू स्वामी, तबले पर मालवीय, ढोलक पर रवि खेड़े और गिटार पर विकास जैन ने मूल संगीत ट्रैक की हुबहू प्रस्तुतियां देकर दर्शकों के दिल की तरंगों को स्पन्दित बनाए रखा। कई गानों पर तो श्रोताओं ने गायकों और संगीतज्ञों को भाव विभोर होकर गले भी लगाया और उनके साथ सेल्फी भी ली। सबने समापन अवसर पर मेक म्यूजिक के डायरेक्टर राजीव रॉय की स्नेहिल घेराबंदी कर उनसे आग्रह किया कि वे ऐसे कार्यक्रम जल्दी-जल्दी और लगातार संजोते रहें।
