गीता भवन में शोभा यात्रा के साथ हुआ सात दिवसीय भागवत ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ, अनेक संत-विद्वान आएंगे

इंदौर,
हमारे विचार शुद्ध होंगे तो कर्म भी श्रेष्ठ बनेंगे। कर्म से ही हमारा स्वभाव और स्वभाव से ही श्रेष्ठ चरित्र का निर्माण होगा। चरित्र से ही प्रारब्ध बनता है। भागवत ग्रन्थ सनातन और हिंदू धर्मावलंबियों के लिए प्राण तत्व एवं आचार संहिता है। बार-बार भागवत कथा श्रवण से हमारे मन मस्तिष्क पर श्रेष्ठ विचारों की छाप उसी तरह बन जाती है, जिस तरह कुए के पत्थर पर रस्सी के निशान। भागवत तो देवताओं के लिए भी दुर्लभ कथा है। भागवत कथा मन को शुद्ध एवं निर्मल बनाने का मंत्र है।
ये प्रेरक विचार हैं वृन्दावन के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती के, जो उन्होंने मनोरमागंज स्थित गीता भवन में भक्त मंडल एवं अखंड प्रणव योग वेदांत पारमार्थिक न्यास के तत्वावधान में गुरुवार से प्रारम्भ हुए भागवत ज्ञान यज्ञ के शुभारंभ सत्र में व्यक्त किए। कथा शुभारंभ के पूर्व गीता भवन परिसर में भागवतजी की शोभा यात्रा निकाली गई जिसमें श्रद्धालुओं ने नंगे पैर मस्तक पर भागवतजी को धारण कर व्यास पीठ पर विराजित किया। प्रारम्भ में भक्त मंडल के राजेंद्र माहेश्वरी, कमल राठी, मनोज गुप्ता एवं सुनील तिवारी, गीता भवन ट्रस्ट के अध्यक्ष राम ऐरन एवं मंत्री रामविलास राठी, सत्संग समिति के प्रदीप अग्रवाल, श्रीमती कांता अग्रवाल, अनिल खंडेलवाल, दिनेश तिवारी आदि ने व्यास पीठ का पूजन किया। गीता भवन में ज्ञान यज्ञ का यह आयोजन शुक्रवार 23 जुलाई तक प्रतिदिन दोपहर 3.30 से शाम 6.30 बजे तक जारी रहेगा। शुक्रवार को ध्रुव चरित्र प्रसंग की कथा होगी। गुरु पूर्णिमा महोत्सव 29 जुलाई को सुबह 10 से 12 बजे तक झलारिया स्थित स्वामी श्रीअखंड वेदांत आश्रम पर मनाया जाएगा।
कथा में परीक्षित जन्म एवं भागवत की महत्ता बताते हुए स्वामी प्रणवानंद सरस्वती ने कहा कि भगवान को हमारे धन की नहीं, शुद्ध और पवित्र मन की जरूरत है। यह मन हमे सत्संग से ही मिलेगा। भक्ति के लिए अपने गृहस्थ धर्म की जिम्मेदारियों को छोड़ने, हिमालय पर जाने या भगवा वस्त्र पहनने की जरूरत नहीं, अपने कर्तव्य पालन करते हुए भगवान को नहीं भूलना ही सबसे बड़ी तपस्या है। भागवत हमारे विचारों को शुद्ध करती है। जिस तरह गंदे कपड़े धोने के लिए डिटर्जेंट की जरूरत होती है, उसी तरह मन की मलीनता को दूर करने के लिए सत्संग रूपी डिटर्जेंट भी जरूरी है।
भक्त मंडल के गोकुल सिंह सिसोदिया एवं प्रदीप नीमा ने बताया कि कथा में शनिवार 18 जुलाई को वामन अवतार, 19 को राम एवं कृष्ण जन्मोत्सव, 20 को गोवर्धन पूजा, 21 को रुक्मणी विवाह एवं सुदामा चरित्र तथा 22 जुलाई को परीक्षित मोक्ष सहित विभिन्न प्रसंगों की कथा के बाद 23 जुलाई को सुबह हवन-पूजन के साथ समापन होगा। इस दौरान स्वामी भारतानंद सरस्वती, स्वामी पूर्णानंद सरस्वती, स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती, स्वामी ब्रजेशानंद सरस्वती, स्वामी अतुलानंद, ब्रह्मचारी ज्ञानेश चेतन्य, ब्रह्मचारी पंढरीनाथ, ब्रहमचारी योगेश, ब्रह्मचारी कन्हैया सहित अनेक जाने-माने संत-विद्वान भी इस अनुष्ठान में शामिल होंगे। कथा के दौरान प्रसंगानुसार विभिन्न उत्सव भी मनाए जाएँगे।
