दलाल बाग़ के विद्या-सुधा सत्संग मंडप में चातुर्मास की महती धर्म सभा – राष्ट्र संत के प्रेरक आशीर्वचन – चातुर्मास तक सभी घरों में शुद्ध भोजन बनाने का संकल्प दिलाया

इंदौर, जैन दर्शन में कोई भी धार्मिक क्रिया स्वयं के लिए नहीं, दूसरों के लिए होती है। पाप और पुण्य का अर्जन गुरु के हाथ में नहीं, हमारे ही हाथों में होता है । पुण्य और पाप कमाना हमारे कर्मों पर निर्भर है। चातुर्मास में संकल्प लें कि जब तक मेरे नगर में साधु विराजित रहेंगे ,घर में शुद्ध भोजन बनेगा और रात्रि भोजन का त्याग भी करेंगे क्योंकि जहां साधु रहते हैं वह क्षेत्र तीर्थ बन जाता है ऐसे तीर्थ में रात्रि भोजन, आलू, प्याज और गुटका आदि व्यसनों का सेवन सही नहीं है। भोजन शुद्ध रहेगा तो हमारे विचार चिंतन और सोच भी शुद्ध बनेंगे। हमारा चातुर्मास तभी सार्थक होगा जब हम आहार-विहार में जैन दर्शन के अनुरूप आचरण करेंगे।
ये प्रेरक और दिव्य विचार है संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. के परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज के जो उन्होंने रविवार को सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में दलाल बाग के विशाल सत्संग सभा मंडप में आयोजित चातुर्मास की महती धर्म सभा में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को आर्शिवचन देते हुए व्यक्त किये। धर्म सभा में दिनों दिन भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है। आसपास के अनेक राज्यों और शहरों के श्रद्धालु नियमित रूप से धर्म सभा में भागीदार बन रहे हैं। रविवार को सत्संग पंडाल का मंडप पूरी तरह भक्तों से भरा रहा। मंगलाचरण के पश्चात आयोजन समिति की ओर से चक्रवर्ती मनीष – सपना गोधा, नवीन -शिवानी गोधा, आनंद-अंतिका गोधा, हर्ष जैन, अशोक रानी डोसी और आकाश जैन कोयला ने सभी साधकों की अगवानी की । संयोजक मनीष गोधा , हर्ष जैन , आकाश जैन कोयला ने बताया कि चातुर्मास में प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक धर्मसभा में राष्ट्रसंत सहित सभी संत विद्वानों के प्रवचनों की अमृत वर्षा होगी। चातुर्मास के दौरान विभिन्न अनुष्ठान भी होंगे। सितंबर माह में 10 दिवसीय संस्कार शिविर का विशेष आयोजन भी होगा।दलालबाग के विशाल परिसर में निर्मित विद्या-सुधा मंडप पर धर्म सभा का शुभारंभ गुरुदेव विद्यासागर महाराज के महापूजन के साथ हुआ। श्रीफल अर्पित करने का लाभ मनोज पंकज वेद और अंकित दिव्या वेद परिवार ने लिया।
अपने आशीर्वचन में प. पू. राष्ट्र संत ने कहा कि
मैं अपने भक्तों को हमेशा हरा भरा देखना चाहता हूं। मैं भगवान के लिए कुछ नहीं कर सकता क्योंकि वह पूर्ण है जबकि भक्तों को बहुत सी जरूरतें होती है। याद रखें कि जैन दर्शन के भगवान को द्रव्य की कोई जरूरत नहीं होती है ।जो भगवान के लिए पूजा करता है, वह जैन भगवान की पूजा नहीं, भक्त के लिए की गई पूजा होती है। भगवान स्वयं में तृप्त हैं, उन्हें किसी की जरूरत नहीं,हम जो करते हैं वह सिर्फ भक्त के लिए करते हैं। आज मंदिरों में पूजन अभिषेक करने वालों की कमी हो गई है।मेरे भगवान के लिए अभिषेक की कोई जरूरत नहीं है। देव ,शास्त्र और गुरु के लिए कुछ भी मत करो लेकिन स्वयं के लिए जरूर करो जैन दर्शन में भी उल्लेख है कि जितनी भी क्रियाएं हैं, वह भगवान के लिए नहीं स्वयं के लिए है। 90 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो अतृप्त होकर घर लौटते हैं जीवात्मा जगत और स्वयं के लिए भी मंगलकारी है। जब कभी तीर्थ यात्रा करना हो तो पदयात्रा ही करें। किसी भी एक तीर्थ क्षेत्र की पदयात्रा जरूर करना चाहिए इससे आपके घुटने में ताकत रहेगी। एक बार अपने शरीर के लिए धर्म के हिसाब से प्रयोग जरूर करें।हमको तीर्थ स्थल पर भीड़ एकत्रित नहीं करना है। जहां से मंदिर की ध्वजा और शिखर दिखाई दे, वहां से पैदल जाने का नियम लेना चाहिए। मंदिर पैदल जाना चाहिए। जितने कदम गुरु के साथ चलोगे उतने कदम की सुरक्षा की गारंटी रहेगी। साधु के विहार करने का आध्यात्म से कोई संबंध नहीं है। विहार की प्रक्रिया सांसारिक सुख प्रदान करती है।आहार में भी यह सोच होना चाहिए कि मैं अपने जीवन को धन्य करने के लिए आहार दे रहा हूं। आहार के लिए कभी यह नहीं कहे कि हमने साधु और गुरु के लिए आहार बनाया है। यह बहुत दुख का कारण बनेगा आहार देना तुम्हारा धर्म है और आहार लेना साधु का धर्म नहीं है। घर में 10 लोग रहे और 11वें का भोजन बने तो तो वह जैनी कहलाता है ।एक व्यक्ति का अधिक भोजन बनाना दान और पुण्य की श्रेणी में आता है।
हर घर में शुद्ध भोजन बनाने का संकल्प -राष्ट्र संत ने चातुर्मास आयोजन समिति से आग्रह किया कि संकल्प ले कि जब तक साधु यहां है तब तक हर घर में शुद्ध भोजन बनेगा। मेरी बात मानोगे तो इस चातुर्मास की चर्चा स्वर्ग तक पहुंचेगी। रात में भोजन का त्याग भी करना चाहिए। जिस घर में साधु आहार करें उस घर में 6 माह तक रात्रि भोजन और आलू, प्याज का त्याग रहना चाहिए। जहां साधु बैठते हैं,उस स्थान की वंदना करने से भी साधु की पूजा का पुण्य मिलता है।
