
इंदौर जिस देश में नींद सस्ती होती है वह देश सर्वश्रेष्ठ होता है। अमेरिका के लोग नींद की गोली खाकर सोते है इसलिए वो देश श्रेष्ठ नहीं हो सकता। हमारे भारत में तो व्यक्ति कभी भी कहीं भी बैठे-बैठे भी सुकून की नींद ले सकता है, इसीलिए अपना देश सर्वश्रेष्ठ है। अमेरिका में भले ही धन हो, शांति नहीं है। हमारे देश में शांति है इसलिए हमें भारत में जन्म लेने का गर्व हर पल महसूस करते रहना चाहिए। मन में यही भाव रखें कि हमारा प्रत्येक जन्म सिर्फ भारत में ही हो।
संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज ने मंगलवार को सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में दलाल बाग के विशाल विद्या-सुधा सत्संग मंडप में आयोजित चातुर्मास की महती धर्मसभा में उपस्थित समाज बंधुओं को संबोधित करते हुए उक्त दिव्य और प्रेरक विचार व्यक्त किए। प्रवचन शुभारम्भ के पूर्व चक्रवर्ती नवीन-शिवानी गोधा, सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद-अंतिका गोधा परिवार द्वारा राष्ट्रदंत को शास्त्र भेंट किया गया। मनोज बज, यश, विजय और संजय पाटनी परिवार ने दीप प्रज्वलन किया। मंगलाचरण सुश्री रिद्धि बांझल ने किया। संयोजक नवीन गोधा, हर्ष जैन, आकाश जैन कोयला एवं आनंद गोधा ने बताया कि रविवार 9 अगस्त को ‘सुधाका सागर’ पुस्तक पर आधारित प्रश्नोत्तरी स्पर्धा का आयोजन होगा जिसमें 8 से 15 वर्ष तक की आयु के बच्चे और 16 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोग भाग ले सकेंगे। विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार भी प्रदान किए जाएँगे। चातुर्मास के दौरान दलाल बाग पर प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक धर्मसभा में राष्ट्रसंत सहित सभी संत विद्वानों के प्रवचनों की अमृत वर्षा होगी। चातुर्मास के दौरान विभिन्न अनुष्ठान भी होंगे।
राष्ट्रसंत ने अपने आशीर्वचन में कहा कि धनवान और महान अथवा सम्पन्न व्यक्ति से भी श्रेष्ठ वह व्यक्ति होता है जो सर्वश्रेष्ठ हो। सर्वश्रेष्ठ होने का मापदंड न तो सुख, न महान और न धनवान होना होता है। जीवन में सर्वश्रेष्ठ होना ही जीवन की सार्थकता होती है। पूजा हमेशा किसी बड़े की नहीं, सर्वश्रेष्ठ की करना चाहिए। सर्वश्रेष्ठ वही होगा जो अपने कामों से अनेक लोगों को लाभ पहुंचाता हो। ऐसे लोगों को नियम लेना चाहिए कि वे अपने आसपास के लोगों को हमेशा फायदा पहुंचाते रहेंगे।
तो कभी भोजन खत्म नहीं होगा – राष्ट्रसंत ने कहा कि परिवार में अन्नपूर्णा की सिद्धि तभी संभव है जब हम संकल्प लें कि अपनी पहुँच का प्रत्येक व्यक्ति जब तक भोजन नहीं करेगा, उसके बाद ही मैं भोजन करूँगा। ऐसा करेंगे तो घर में कभी भोजन खत्म नहीं होगा। जो स्वयं भूखा रहकर दूसरों का पेट भरता है वही श्रेष्ठ होता है। संसार में मात्र एक जिनेन्द्र देव ही ऐसे हैं जो भक्त को अपने जैसा बना लेते हैं। भक्त को भगवान बनाने की ताकत सिर्फ जैन दर्शन में है। भगवान से कहें कि मेरे नौकर को भी मेरे जैसा बना दो, उस दिन तुम भी सर्वश्रेष्ठ बन जाओगे।
मैं संसार का सबसे सुखी व्यक्ति – उन्होंने कहा कि इस संसार में मैं अपने आप को सबसे सुखी मानता हूँ क्योंकि मेरे मन में कभी किसी के लिए बुरा सोच नहीं आता। मुझे इस बात का गर्व है कि मैंने कभी न तो किसी को बुरा बोला, न मेरी आँख ने बुरा देखा, न मेरे मन ने गलत सोचा, न मेरे हाथ गलत काम के लिए उठे और न ही मेरे पैर ने किसी जीव को नुकसान पहुंचाया। दुनिया में सबसे बड़ा पापी वह व्यक्ति होता है जिसके माता-पिता दुखी रहते हैं। हमारे निकट वाले जितने लोग हमसे दुखी हैं, हम उतने ही बड़े पापी हैं। ऐसे लोगों को मेरा आशीर्वाद काम नहीं आएगा इसलिए मेरे पास वही लोग आएं जिनसे उनके परिवारजन और मित्रजन सुखी हैं। किसी की आंख में धूल झोंकने से आप धर्मात्मा नहीं हो सकते। हमारे कर्म ऐसे होना चाहिए कि धर्म हम करें और प्रेरणा दूसरे लोग लें, वे भी मन्दिर जाना शुरू कर दें। धर्म करते समय भी यदि हमारा कुछ बुरा हो जाए तो यह विचार रखना कि मुझसे जरुर कोई त्रुटि हुई होगी।
