अपने गोदाम और वेयरहाउस में सनातन धर्म की समृद्धि के लिए ज्ञान,
भक्ति और प्रेम के साथ श्रद्धा का भी भण्डारण करें – पं. प्रभुजी नागर


इंदौर, । हम अपने व्यापार और कारोबार में प्रतिदिन अपने गोदाम और वेयरहाउस भरने की चिंता में जुटे रहते हैं। जीवन चलाने के लिए यह सब जरुरी भी है लेकिन सनातन धर्म की समृद्धि के लिए ज्ञान, भक्ति और प्रेम के साथ श्रद्धा का भी भंडारण करना चाहिए। भागवत की कथा भक्ति, ज्ञान और वैराग्य से ही शुरू होती है। समाज के संपन्न और सक्षम लोग यदि इस तरह के अनुष्ठान में भागीदार नहीं बनेंगे तो हमारी नई पीढ़ी को धर्म, समाज और संस्कृति से जोड़ने के प्रयास फलीभूत नहीं होंगे। हम सबकी भक्ति भागवत के माध्यम से जागृत होना चाहिए। जीवन की गाड़ी को चलाने के लिए नई चार के शोरूम पर जिस तरह पुष्टे (गत्ते) से बड़ी चाबी बनाकर फोटो खिंचवाने के बाद मालिक को सौंप दी जाती है लेकिन वह चाबी केवल दिखाने के लिए होती है। आज समाज में पाखंड, प्रदर्शन, प्रपंच और नाटक-नौटंकी ज्यादा चलने लगे हैं लेकिन इनकी उम्र ज्यादा नहीं होती। जीवन की वास्तविक गाड़ी तो छोटी चाबी से ही स्टार्ट होगी और उस चाबी से ही हम अपनी गाड़ी को आगे बढ़ा सकेंगे।
मालव माटी के सपूत, माँ सरस्वती के वरद पुत्र और प्रदेश में 200 से अधिक गौशालाओं के संचालक संत कमलकिशोर नागर के सुपुत्र तथा प्रख्यात भागवत मर्मज्ञ संत प्रभुजी नागर ने गुरुवार को शहर के प्रसिद्द आस्था केंद्र अन्नपूर्णा मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय भागवत ज्ञान यज्ञ के शुभारंभ प्रसंग पर उक्त बातें कही। कथा का शुभारंभ अन्नपूर्णा मंदिर के प्रवेश द्वार से बैंड-बाजों, ढोल-धमाकों और परंपरागत वाद्ययंत्रों से निकली भजनों की सुर एवं स्वर लहरियों के बीच निकली, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाऐं परंपरागत लाल चुनरी एवं साड़ी के परिधान में मस्तक पर सप्त नदियों के जल से भरे कलश एवं श्रीफल धारण कर नाचते-गाते हुए शामिल हुई । अन्नपूर्णा आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि, ओम्कारेश्वर के अन्नपूर्णा मंदिर के महामंडलेश्वर स्वामी सच्चिदानंद गिरि, स्वामी जयेंद्रानंद गिरि एवं छत्रीबाग नरसिंह मंदिर के संत वरुण महाराज के सानिध्य में कलश यात्रा मंदिर परिसर से होते हुए कथा स्थल पहुंची, जहाँ कथा के मुख्य यजमान सुरेश अग्रवाल, पूर्व सांसद कृष्ण मुरारी मोघे, समाजसेवी रामबाबू अग्रवाल, दिनेश बंसल पंप, श्यामबाबू, रमेश अग्रवाल, सुखदेव पाटीदार, ओमप्रकाश बंसल, हेमंत गर्ग सहित बड़ी संख्या में शहर के गणमान्य नागरिकों एवं गौभक्तों ने उनकी अगवानी की। व्यास पीठ पर विराजित होने के बाद अन्नपूर्णा के महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच व्यास पीठ का पूजन किया। मंच का संचालन राजेश अग्रवाल ने किया। अन्नपूर्णा के इस परिसर में पं. प्रभुजी अपने श्रीमुख से 12 नवंबर तक प्रतिदिन दोपहर 12 से 3 बजे तक भागवत कथामृत की वर्षा करेंगे।
लंबे अन्तराल के बाद इंदौर पधारे पं. प्रभुजी नागर ने माँ अन्नपूर्णा और महादेव के चरणों में वंदन करते हुए कथा में उपस्थित सभी संतों का अभिवादन किया और कहा कि जहाँ संत होते हैं वहां भगवंत भी होते हैं। माँ अन्नपूर्णा केवल अन्न नहीं, अमृत की भी वर्षा करती है। अन्नपूर्णा के इस पवित्र आंगन में आज हाटकेश्वर धाम के साथ त्रयम्बकेश्वर और ओम्कारेश्वर जैसे ज्योतिर्लिंग का संयोग भी बन गया है। कथा आयोजक सुरेश अग्रवाल के दालमील कारोबार का उल्लेख करते हुए पं. नागर ने कहा कि यह संतों की कृपा है कि माँ अन्नपूर्णा के इस दिव्य धाम में उन्होंने हमारी दाल-रोटी को स्वीकार कर लिया है। हमारे पास न विद्वत्ता है, न कोई सिद्धि, न कोई तंत्र और न कोई मंत्र। हमारे पास तो केवल दो विभूति है-सादगी और सरस्वती। सादगी ही हमारी रोटी है। रोटी बनाना, खाना और पचाना सबकुछ आसान है। बिना दाल के रोटी का आनंद नहीं मिल सकता, इसलिए जीवन का आनंद दाल-रोटी में ही है। भगवान से प्रार्थना यही है कि हम सबकी दाल-रोटी हमेशा चलती रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भागवत ज्ञान यज्ञ का अनुष्ठान इसलिए भी निरंतर होते रहना चाहिए कि कलियुग 5 लाख ७२ हजार वर्ष का है और अभी प्रथम चरण चल रहा है। इसमें भी उसने भारी उधम मचा रखी है, इसलिए हमें भी मुकाबले में भागवत और सनातन धर्म की मजबूती के लिए इस तरह के अनुष्ठानों में निरंतरता की जरूरत है। हम बरसों से वही पोथी, ज्ञान, वैराग्य और भक्ति की कथा “एक समय की बात है….” की शुरुआत से सुनते आए हैं लेकिन अब समय के साथ हमें भी बदलाव करना होगा। सबको पता है कि भागवत कथा क्या है, कहाँ से शुरू होती है और क्या-क्या उसके मुख्य पात्र हैं। जैसे हम कार के शोरूम पर जाते हैं तो एक बहुत बड़ी पुष्टे (गत्ते, स्ट्राबोर्ड) की नकली चाबी सिर्फ फोटो खिंचाने के लिए दी जाती है। उससे गाड़ी स्टार्ट नहीं हो सकती। वह सब दिखावा होता है। हमारे जीवन में भी यही सब हो रहा है। सनातन धर्म को मजबूत बनाने और कल्याण करने के लिए हमें ऐसी नकली चाबी नहीं, असली चाबी चाहिए। कथा तो हमने माँ के गर्भ में भी सुनी और अब सुनते-सुनते बूढ़े हो गए हैं। भगवान की कृपा है कि हमें भागवत रुपी अमृतवर्षा मिल रही है। उन लोगों का बड़ा पुरुषार्थ है जो अपने-अपने काम-धंधे में व्यस्त होने के बावजूद कथा जैसे अनुष्ठान से जुड़ रहे हैं। किसी को पानी पिलाने या भोजन कराने का लाभ एक या दो दिन बाद पूरा हो जाता है लेकिन कथा का एक शब्द भी जीवन में उतर गया तो उसका पूरा जीवन सुधर जाता है। भोजन, भंडारे और प्याऊ तो बहुत सारे हो गए हैं, अब तो अमृत की बात करना चाहिए। हमारे युवा साथियों को श्रद्धा और भक्ति के साथ धर्म और संस्कृति से जोड़ने के लिए इस दौर में उन्हें मंदिरों में लाकर घंटी बजवाने की सख्त जरूरत है। श्रद्धा और भक्ति के समन्वय से ही हम अपनी नई पीढ़ी को तैयार कर सकते हैं। यहाँ आज पहले दिन आए हुए श्रोता तो जगन्नाथ के भात की तरह है, आज हमने माँ अन्नपूर्णा को भात भी समर्पित कर दिए हैं।
कथा के दौरान उपस्थित हजारों भक्तों ने पं. कमल किशोर नागर के प्रिय भजन “राम नाम बोलो प्रभु हरे राम बोलो” सहित अनेक भजनों का भी नाचते-गाते हुए आनंद लिया। पं. नागर की कथा की व्यवस्थाओं का इंतजाम देखने झाबुआ जिले से तीर-कमान धारी 5 आदिवासी भी कथा स्थल पर अपनी सेवाएँ देते देखे गए। ये पूरे सात दिनों तक कथा के दौरान खड़े रहकर अथवा पंडाल में घुमकर श्रोताओं की समस्याओं का समाधान अथवा मार्गदर्शन भी करेंगे और रात्रि में कथा स्थल की सुरक्षा भी करेंगे।
