मारवाड़ी माहेश्वरी प्रगति मंडल द्वारा शोभा यात्रा के साथ गीता भवन में 7 दिवसीय भागवत ज्ञान यज्ञ का शुभारम्भ

इंदौर भागवत कथा केवल श्रद्धावान लोगों के लिए है, चतुरों के लिए नहीं। यह कथा ऐश्वर्य की तराजू में नहीं तोली जा सकती। यह बुद्धिमानों का व्यापार नहीं, श्रद्धावानों का दिल है। हम उस संस्कृति की संतान है जो अपने पिता की आज्ञा से वन में जाकर भगवान बन जाते हैं। भगवान के प्रति जिसकी जैसी भावना होती है, उसे तीर्थ, मूर्ति या अन्य किसी रूप में प्रतिष्ठापित कर देता है। जगत में रहते हुए जगदीश की समीपता कैसे मिले और जीते-जी मुक्ति के लिए क्या करना चाहिए, यही भागवत सिखाती है।
माहेश्वरी समाज की अग्रणी संस्था मारवाड़ी माहेश्वरी प्रगति मंडल की मेजबानी में मनोरमागंज स्थित गीता भवन पर रविवार से प्रारम्भ हुए सात दिवसीय भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव में वृन्दावन के जगदगुरु श्री गोपेश्वर चैतन्य महाराज ने शुभारम्भ सत्र में उक्त ओजस्वी विचार व्यक्त किए। कथा शुभारंभ के पूर्व सुबह गीता भवन से भागवत जी एवं विद्वान वक्ता की कलश यात्रा प्रारम्भ हुई जो आसपास के क्षेत्रों में होती हुई पुनः गीता भवन पहुंची। यात्रा में मातृशक्ति ने नंगे पैर मस्तक पर पवित्र नदियों के जल से भरे कलश धारण किए थे। मार्ग में जगह-जगह राधे-राधे के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं का पुष्प वर्षा के बीच स्वागत किया गया। दोपहर में व्यास पीठ पर विराजित होने के बाद मंडल के अध्यक्ष रामकिशोर राठी, मंत्री मनोज धूत एवं प्रकाश लखोटिया, रामअवतार पलोड़, सुनील बंग सहित मंडल के पदाधिकारियों ने यजमान समूह के साथ जगदगुरु श्री गोपेश्वर चैतन्य महाराज का स्वागत एवं दीप प्रज्वलन कर भागवतजी का पूजन किया। इस अवसर पर विभिन्न समितियों के संयोजक मंजू डागा, उषा खटोड, अमरचंद सोनी, गिरिराज बंग, राम वल्लभ भूतड़ा, गौरीशंकर लोहिया, रामप्रसाद चांडक एवं श्याम सुंदर कोठारी ने विद्वान वक्ता की अगवानी की। गीता भवन ट्रस्ट के मंत्री रामविलास राठी भी विशेष रूप से उपस्थित थे। अध्यक्ष रामकिशोर राठी ने बताया कि गीता भवन में जगदगुरु श्री गोपेश्वर चैतन्य महाराज के श्रीमुख से 13 जून तक प्रतिदिन दोपहर 3 से शाम 7 बजे तक भागवत कथामृत की वर्षा होगी। कथा के दौरान विभिन्न प्रसंगानुसार उत्सव भी मनाए जाएँगे, जिनकी व्यापक तैयारियों भी की गई है।
कथा में जगदगुरु चैतन्य महाराज ने कहा कि भागवत ऐसा कल्पवृक्ष है जिसकी छाया में हम भूले से भी चले जाएँगे तो अनेक सदगुणों की प्राप्ति हो जाएगी। भागवत मुक्ति और मोक्ष का ग्रन्थ है। जगत में रहते हुए जगदीश की निकटता कैसे मिले और जीते जी मुक्ति के लिए क्या करना चाहिए यह सब सीखना है तो भागवत की शरण में आना ही पड़ेगा। भागवत वह महासागर है जिसमें अनेक अनमोल रत्नों का भंडार भरा पड़ा है। जितने गहरे उतरेंगे उतने आभूषण जीवन को सँवारने के लिए मिल जाएँगे।
