वनबंधु परिषद के राष्ट्रीय पदाधिकारियों और तीन तपोनिष्ठ संतों की मौजूदगी में हुआ गोदा-रंगनाथ का अनूठा विवाह

इंदौर शिक्षा ऐसा धन है जिसे कोई चुरा नहीं सकता। एक व्यक्ति की शिक्षा से पूरा परिवार, समाज और राष्ट्र शिक्षित एवं संस्कारित होता है। वनवासी और ग्रामीण अंचलों के बच्चों के लिए वनबंधु परिषद ने लक्ष्मी-नारायण विवाह के माध्यम से अधिकमास में जो पुरुषार्थ किया है, वह सनातन धर्म को भी मजबूती प्रदान करेगा और एक समृद्ध राष्ट्र के साथ ही संस्कारित समाज के निर्माण का भी मार्ग प्रशस्त करेगा। 21वीं सदी के भारत के निर्माण का सपना तभी पूरा होगा जब आदिवासी और वनवासी बच्चे भी शिक्षा के साथ धर्म और संस्कार से जुडकर देश को विश्व गुरु बनाने की नई इबारत लिखेंगे।
बायपास स्थित भंडारी रिसोर्ट पर रविवार को जगदगुरु रामानुजाचार्य अवन्तिका पीठ युवराज स्वामी डॉ. माधव प्रपन्नाचार्य ने उक्त प्रेरक बातें कही। जगदगुरु के सानिध्य में यहाँ लक्ष्मी-नारायण का अनूठा विवाह सम्पन्न हुआ जिसमें “गाँव पढ़ेगा तो देश बढेगा” थीम पर वनवासी अंचलों में संचालित 22 स्कूलों के 720 बच्चों की शिक्षा के सहायतार्थ धनराशि विवाह स्थल पर ही प्राप्त हुई जबकि स्वयं डॉ. माधव प्रपन्नाचार्य ने भी अपनी ओर से दो स्कूलों के बच्चों के लिए धनराशि प्रदान की। विवाह स्थल पर रखे गए सेवा पात्र एवं हुंडी में आई कन्यादान की राशि की गणना अभी बाकी है। विवाह समारोह का आयोजन वनबंधु परिषद, फ्रेंड्स ऑफ़ ट्रायबल सोसायटी (एफटीएस) महिला समिति द्वारा किया गया। परिषद की अध्यक्ष सीमा रणधर एवं सचिव मीना गर्ग ने बताया कि इस अवसर पर स्वामी डॉ. माधव प्रपन्नाचार्य के सानिध्य में सुबह बारात निकाली गई जिसमें वनबन्धु परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश माहेश्वरी, राष्ट्रीय महिला समिति की अध्यक्ष विनिता जाजू, संरक्षक गीता मूंदड़ा, वनबंधु परिषद की वेस्ट ज़ोन की चेयर पर्सन माधवी झंवर भी विशेषरूप से शामिल हुए। अतिथियों का स्वागत उत्सव समिति की संयोजक विद्या मुछाल, उर्मिला सारडा, समता मूंदड़ा, ज्योति गर्ग, मुदिता झंवर, सुनीता जैन एवं शोभना जैन ने किया। ग्रामीण संगठन म.भा. महिला समिति की अध्यक्ष सरस्वती शर्मा, सुषमा चौधरी, वनबंधु परिषद इंदौर चैप्टर के निवृतमान अध्यक्ष रामअवतार जाजू सहित अनेक विशिष्ठजन भी इस विवाह में शामिल हुए।
सुबह वाद्य यंत्रों की मंगल ध्वनि के बीच रंगनाथ-गोदा के विवाह की तर्ज पर डॉ. माधव प्रपन्नाचार्य एवं स्वामी रंगनाथाचार्य महाराज के निर्देशन में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह की रस्म सम्पन्न हुई जिसमें आदिवासी अंचलों से आए स्कूली बच्चे भी विशेष रूप से मेहमान के रूप में शामिल हुए और उन्होंने भी माधुर्य भोज एवं विवाह की रस्मों का आनंद लिया। इन बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ विवाहोत्सव की व्यवस्थाओं में भी सहयोग प्रदान किया और शनिवार की रात को अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सबको मंत्रमुग्ध बनाए रखा। सभी मेहमानों ने वनवासी बच्चों की शिक्षा के उद्देश्य से आयोजित इस महोत्सव की खुलेमन से प्रशंसा करते हुए महिला समिति को बधाई एवं शुभकामनाएं प्रदान की। विवाह की सभी व्यवस्थाएं घर परिवार में होने वाले विवाह जैसी की गई थी। विवाह स्थल पर की गई सभी व्यवस्थाओं की सभी मेहमानों ने खुलेमन से सराहना की।
